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अपना पिछड़े

rashmi gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पत्ता पत्ता अब बिखरेगा
        
                                                    
                            
हर किसी की कहानी कौन लिखेगा
जन जन तो अब टूट रहे है
कौन संभला हमें दिखेगा
कोई दुरुस्त अपनी दीवारों से
कौन नदियों तालाब भरेगा
सबको चिंता है बस अपनी अपनी
कौन बस्ती में अब बसेगा
तेरी मेरी तो सब कर लेते है
हमारी सबकी कौन कहेगा
पत्ता पत्ता सब बिखरेगा
अपने अपने के चक्कर में
सबका अपना भी पिछड़ेगा
10 महीने पहले
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