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सौ फ़ीसदी किसकी

Ranjana Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने बस में कुछ नहीं
        
                                                    
                            
मान लिया उसकी मर्ज़ी यही
उसने कुछ और थी लिखी
औरों ने कुछ और थी माँगी

अपने अंदर हज़ारों
छुपी घुटी अनकही
कोशिकाओं में दबी
सुबकती सिसकतीं पड़ीं
यह इच्छाओं की बरसातें
क्या कभी कहीं ख़त्म हुई

ना तेरी सारी ना मेरी सारी
अधूरी यहाँ वहाँ बिखरी पड़ीं
गर पूरी हो जाएँ सारी
बैठे निठल्ले हो जाएँगे हर घड़ी
सौ फीसदी कब किसकी चली
आधी तिहाई चौथाई की मुठभेड़ रही
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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