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ख़ामोशियाँ

Ranjana Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब छोड़ भी दो हमें याद करना,
        
                                                    
                            
हिचकियाँ लेते-लेते रातें सो नहीं पातीं।
नींद भी रूठी है, ख़यालों में तुम्हारा पहरा,
ख़ामोशियाँ फिर भी यादों के रंग सजाती हैं।

चाँद में भी तुम्हारा ही अक्स ठहर जाता है
गिनती तारों की अब हमसे हो नहीं पाती।
3 महीने पहले
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