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हम और आप कब तक ..

Ranjana Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करते करते ख़ुशियों का इंतज़ार
        
                                                    
                            
निकल रहे सोमवार से रविवार

छुपी जहां , बाहर ले आयें
मुस्कुरा और हंस लिया जाये ।

दिन , माह , बरस गुजर जाएँगें
हम और आप कब तक नज़र आयेंगे

धुंधली सी छवि रह जाएगी
फोटो पर माला टंग जाएगी ।

यही शाश्वत चला आया नियम
जियो आज छोड़ फिर जीने के भ्रम

क्यों दबी ज़ुबान जब सत्य पथ पर
बढ़ रहे कदम ख़ुद उठ उठ कर ।

ना तुम असहाय ना बेसहारा
दे रहा भरपूर वो इक देने वाला

शुक्र उसका जो साँसे दिये जा रहा
गुस्ताखियों को माफ़ किए जा रहा ।

 
2 वर्ष पहले
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