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केरल हेतु

Ramkumar Mathur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काले बादल
        
                                                    
                            
धरा पर तांडव
कुटिल यम

हताश मन
हित कृतांत-सम
डूबते जन

हे! देवदूत
छाया घोर तिमिर
सजल नयन

तारणहार
जन दृगवंचित
टूटता संयम

सुनो वन्दना
दूर हों काले मेघ
खिलें आँगन

- राम कुमार माथुर

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले
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