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साक्षी भाव

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सचमुच संसार में ना ही अच्छा का ना ही बुरा का करते हुए चुनाव,
        
                                                    
                            
बहुत ही छोटा हो या बहुत ही बड़ा सब में रखते हुए समभाव,
स्वयं को दृष्टा और बाकी मन इंद्रिय शरीर सब को दृश्य समझ कर,
योगी स्वयं को जानने हेतु खुद में विकसित करता है साक्षी भाव|
-मनस्व
एक महीने पहले
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