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खुद ही पढ़ पढ़ कर

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां सच रोज नए नए इतिहास रचता है आगे बढ़ बढ़ कर,
        
                                                    
                            
जहां सच अपने सपने पूरा करता है रोज नई सीढ़ियां चढ़ चढ़ कर,
वही झूठ इसी सच के नाम पर रोज झूठी कहानियां गढ़ गढ़ कर,
खुश होता है कभी औरों को सुना कर कभी खुद ही पढ़ पढ़ कर|

-मनस्व
एक दिन पहले
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Ankit Kumar

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