जहां सच रोज नए नए इतिहास रचता है आगे बढ़ बढ़ कर,
जहां सच अपने सपने पूरा करता है रोज नई सीढ़ियां चढ़ चढ़ कर,
वही झूठ इसी सच के नाम पर रोज झूठी कहानियां गढ़ गढ़ कर,
खुश होता है कभी औरों को सुना कर कभी खुद ही पढ़ पढ़ कर|
-मनस्व
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