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हवाएं अपने साथ उड़ाए ले जा रही हैं पतंग जी

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी लगता है उड़ रही है यह हवाओं के संग जी,
        
                                                    
                            
कभी लगता है कर रही है यह हवाओं से जंग जी|
कभी लगता है कर रही है यह हवाओं को तंग जी,
कभी लगता है हवाएं उड़ाए ले जा रही हैं पतंग जी||

सुनकर हो सकता है हो जाओ तुम दंग जी,
हो सकता है तुम्हारे चेहरे का उड़ जाए रंग जी|
यदि तुम सीखना चाहते हो इसे उड़ाने का ढंग जी,
ध्यान रखो जरा भी मन की एकाग्रता न हो भंग जी||
-मनस्व
एक घंटा पहले
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