आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

क़तील शिफ़ाई: तड़पती हैं तमन्नाएँ किसी आराम से पहले

qateel shifai famous ghazal tadapti hain tamannayein kisi araam se pahle
                
                                                         
                            


तड़पती हैं तमन्नाएँ किसी आराम से पहले
लुटा होगा न यूँ कोई दिल-ए-नाकाम से पहले

ये आलम देख कर तू ने भी आँखें फेर लीं वर्ना
कोई गर्दिश नहीं थी गर्दिश-ए-अय्याम से पहले

गिरा है टूट कर शायद मिरी तक़दीर का तारा
कोई आवाज़ आई थी शिकस्त-ए-जाम से पहले

कोई कैसे करे दिल में छुपे तूफ़ाँ का अंदाज़ा
सुकूत-ए-मर्ग छाया है किसी कोहराम से पहले

न जाने क्यूँ हमें इस दम तुम्हारी याद आती है
जब आँखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले

सुनेगा जब ज़माना मेरी बर्बादी के अफ़्साने
तुम्हारा नाम भी आएगा मेरे नाम से पहले

9 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर