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बिन बरसे तो रह जाते हैं बनकर सिर्फ गगन के बादल

Ramjeet pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खूब जमकर बरसे जमकर गरजे और जमकर ठनके बादल,
        
                                                    
                            
जोड़ लिए धरती के तन मन से तार अपने तन मन के बादल,
किंतु जिन दिन बिन बरसे ही आगे की ओर दूर निकल जाते हैं,
सचमुच उस दिन तो बनकर रह जाते हैं सिर्फ गगन के बादल|
-मनस्व
3 महीने पहले
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