खूब जमकर बरसे जमकर गरजे और जमकर ठनके बादल,
जोड़ लिए धरती के तन मन से तार अपने तन मन के बादल,
किंतु जिन दिन बिन बरसे ही आगे की ओर दूर निकल जाते हैं,
सचमुच उस दिन तो बनकर रह जाते हैं सिर्फ गगन के बादल|
-मनस्व
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