मुक्तक विन्यास में **तेवरी**
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अब तम घनघोर दिखायी दे
बस आदमखोर दिखायी दे |
ये कैसा रूप सियासत का ?
हर कोई चोर दिखायी दे ||
अब तम घनघोर दिखायी दे
मानव भी ढोर दिखायी दे |
बन बैठे नेता बाज़-गिद्ध
कोई तो मोर दिखायी दे ||
किरणों की डोर दिखायी दे
अब आता भोर दिखायी दे |
मातम ही मातम क्यों पसरा ?
खुशियों का छोर दिखायी दे ||
-रमेशराज