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रसोइया पर कविता

Rambriksh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्कूल की रसोइयां
        
                                                    
                            

राह देखते हैं बच्चे
जिनके आने की
आस लगाए बैठे रहते
भोजन बन जाने की,
प्यार परोसा जाता तेरा
हर थाली में
फिर मिटती है क्षुधा तेरे ही
रखवाली में
कौन कहेगा? तेरे वेतन से
घर चलता है
सच तो है कि -
प्यार से तेरे उन बच्चों का
मन भरता है
सच पूछो तो,
स्कूलों की क ख ग हो
भूखे प्यासे उन बच्चों की
सच्ची मां हो।
भूखे प्यासे उन बच्चों की
सच्ची मां हो,
सच्ची मां हो।
-रामवृक्ष बहादुरपुरी
 
एक महीने पहले
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