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युवा चेतना

RAMANUJ PATHAK

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            युवा चेतना
        
                                                    
                            

युवा न केवल उम्र है,
युवा नई पहचान।
सीख रहा जो हर घड़ी,
वही युवा महान॥

सूचनाओं के शोर में,
सत्य-स्वर पहचान।
चमक-दमक के जाल में,
मत खो अपना मान॥

जल्दी पाने की चाह में,
धीरज मत खोना।
गिरकर फिर उठना सदा,
राह न अपनी खोना॥

प्रश्न करो, तर्कों से
सत्य स्वयं पहचान।
अंधी दौड़ न दौड़कर,
अपनी राह बनान॥

केवल अपना कल नहीं,
सबका कल सँवार।
अपने सपनों की किरण,
कर दे देश उजियार॥

हाथों में हो कर्मबल,
मन में विज्ञान महान।
हृदय भरा हो प्रेम से,
सेवा हो पहचान॥

नव-विचार की ज्योति से,
नव युग को आलोक।
ज्ञान बने संबल सदा,
दूर करे हर शोक॥

उम्र भले बढ़ती रहे,
मन हो सदा जवान।
सीखने की प्यास रहे,
यही युवा की शान॥

अपने हित से ऊपर उठ,
जनहित का कर मान।
जिसके कर्मों से बने,
राष्ट्र नया महान॥

युवा वही जो राह में,
गिरे हुए को थाम।
अपने संग समाज को,
लेकर बढ़े तमाम॥

स्वप्न अकेले मत सजाओ,
स्वप्न करो साकार।
अपने श्रम से देश का,
लिख दो नव इतिहास॥

युवा होना उम्र नहीं,
युवा चेतना-धार।
अपने संग राष्ट्र को,
ले चलना साकार॥
एक दिन पहले
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Aditya Mishra

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