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युवा हूं मैं

Ramanand Pareek

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नई सोच की उड़ान हूं मैं, संस्कारों का मान हूं
        
                                                    
                            
दो पीढ़ी को साध सके जो, मैं ऐसी पहचान हूं।

अदम्य सा उत्साह हूं, मैं श्रेष्ठता की राह हूं
समुद्र सा अथाह हूं, नदी का मैं प्रवाह हूं

जिज्ञासा हूं, प्रत्याशा हूं, साहस की परिभाषा हूं
विश्वगुरु हो देश हमारा, जन-जन की अभिलाषा हूं

आजाद हूं विचारों से पर बंधा हूं मैं संस्कारों से
खेता हूं मैं नाव को अपनी हिम्मत की पतवारों से

मैं साज़ हूं, आवाज हूं, कलम हूं मैं अल्फाज हूं
तकता जिसकी ओर जमाना, मैं ऐसा अंदाज हूं

अपरिमित क्षमता है मेरी, राष्ट्र पर ममता है मेरी
धर्म जाति में बांट ना पाओ, दृष्टि में क्षमता है मेरी

संयम, तप और त्याग हूं, मैं परिवर्तन का राग हूं
एक अरब चालीस करोड़, उम्मीदों का चिराग हूं
8 महीने पहले
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samarth dalela

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