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आंसू

Ramanand Pareek

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन भावों से भर जाए तो
        
                                                    
                            
दृगकोरक में आते आंसू

अंतःकरण का मैल पौंछकर
मन निर्मल कर जाते आंसू

दिल पर बोझ हुआ भारी तो
पीड़ा को कह जाते आंसू

बहुत खुशी हो या कोई गम
दोनों को सह जाते आंसू

एहसास जो जिंदा है सीने में
इसका साक्ष्य दिलाते आंसू

सजल नयन देखे जो उनके
हमको भी तो रुलाते आंसू

छिटक जाए अपना कोई जब
उसको पास बुलाते आंसू

अपनेपन की धमकियों से
अपनों को दहलाते आंसू

खामोश जुबां हो फिरभी देखो
सब कुछ तो कह जाते हैं
3 वर्ष पहले
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samarth dalela

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