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ताकत शब्द की

Raman swasth

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बोलने वाला शब्द हो अतिप्रिय सुमधुर
        
                                                    
                            
इस बात का ध्यान रखना चाहिये ।

खारा शब्द न निकले कोई भी कभी
जासे हृदय दुखित न हो जाना चाहिए

शब्द शब्द बनता है उत्तम औषधि का नुस्खा
इससे उत्पन्न व्याधियों का उपचार करना चाहिये ।

शब्द ही बनाता है दुष्ट धाव को फौरन
बने घाव को इसी से ठीक करना चाहिये ।

शब्द से होते है सम्बन्ध प्रगाढ अधिक
शब्द से सम्बन्ध को न धूमिल करना चाहिये।

शब्द से आँख का काजल बनते है लोग लोगों के मध्य बोल कटु शब्द आँख से आँसू न बहाना चाहिये ।

देखो शब्द में धार कितनी तेज है बहुत
वार से इसके किसी को न कटने देना चाहिये ।

शब्द को शब्द ही आप रहने दीजिये
इसे अपशब्द का दर्जा न देना चाहिये ।

घोर आघात यदि मन में लगा शब्द का
तो शब्द को इस मन से निकाल फेकना चाहिये ।

शान्ति मिलेगी शूल होगा काफूर तब
सच में ऐसे मन से मन को मिलाना चाहिये ।

मन मिलने से पड़ीददार इनकी हो जाती है गायब
करो ऐसा टूटते रिश्ते जुड़ जाना चाहिये ।

बहुत अहंकार न कर अपने शब्द में भूल से,
यह तो पतन का कारण इसे न बनने देना चाहिये।

गलतियो का पुतला है मानव वास्तव में
मगर समय पर गलतियों में सुधार लाना चाहिये।

कितनी दुखद ही परिस्थिति हो कोई क्यों न
पर यहाँ सुखदभाव अविलम्ब जगाना चाहिये ।

भाव बदलेगा राहत मिलेगी तुम्हें
यो दुखद भाव को दूर भगाना चाहिये ।

सुमधुर बोल भले से संजोते हुए
हर जिन्दगी को खुशहाल बनाना चाहिये।

मृदुभाषण प्रेम की खान होते हैं यारो
इन्हें उपहार स्वरूप सब में बांटना चाहिये ।

माना जिन्दगी है हर ओर से कंटकोभरी
परन्तु शब्द सुमनो के संग इसे जीना चाहिये।

आप शब्द शब्द की हैसियत समझो अवश्य
तुम्हें इसकी ताकत पर गौर फरमाना चाहिये ।

जिन्दगी की है असल हकीकत यही
इसे भली भाँति रमन मन मन समझना चाहिये ।

- रामकुमार जायसवाल रमन
 
5 महीने पहले
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