बोलने वाला शब्द हो अतिप्रिय सुमधुर
इस बात का ध्यान रखना चाहिये ।
खारा शब्द न निकले कोई भी कभी
जासे हृदय दुखित न हो जाना चाहिए
शब्द शब्द बनता है उत्तम औषधि का नुस्खा
इससे उत्पन्न व्याधियों का उपचार करना चाहिये ।
शब्द ही बनाता है दुष्ट धाव को फौरन
बने घाव को इसी से ठीक करना चाहिये ।
शब्द से होते है सम्बन्ध प्रगाढ अधिक
शब्द से सम्बन्ध को न धूमिल करना चाहिये।
शब्द से आँख का काजल बनते है लोग लोगों के मध्य बोल कटु शब्द आँख से आँसू न बहाना चाहिये ।
देखो शब्द में धार कितनी तेज है बहुत
वार से इसके किसी को न कटने देना चाहिये ।
शब्द को शब्द ही आप रहने दीजिये
इसे अपशब्द का दर्जा न देना चाहिये ।
घोर आघात यदि मन में लगा शब्द का
तो शब्द को इस मन से निकाल फेकना चाहिये ।
शान्ति मिलेगी शूल होगा काफूर तब
सच में ऐसे मन से मन को मिलाना चाहिये ।
मन मिलने से पड़ीददार इनकी हो जाती है गायब
करो ऐसा टूटते रिश्ते जुड़ जाना चाहिये ।
बहुत अहंकार न कर अपने शब्द में भूल से,
यह तो पतन का कारण इसे न बनने देना चाहिये।
गलतियो का पुतला है मानव वास्तव में
मगर समय पर गलतियों में सुधार लाना चाहिये।
कितनी दुखद ही परिस्थिति हो कोई क्यों न
पर यहाँ सुखदभाव अविलम्ब जगाना चाहिये ।
भाव बदलेगा राहत मिलेगी तुम्हें
यो दुखद भाव को दूर भगाना चाहिये ।
सुमधुर बोल भले से संजोते हुए
हर जिन्दगी को खुशहाल बनाना चाहिये।
मृदुभाषण प्रेम की खान होते हैं यारो
इन्हें उपहार स्वरूप सब में बांटना चाहिये ।
माना जिन्दगी है हर ओर से कंटकोभरी
परन्तु शब्द सुमनो के संग इसे जीना चाहिये।
आप शब्द शब्द की हैसियत समझो अवश्य
तुम्हें इसकी ताकत पर गौर फरमाना चाहिये ।
जिन्दगी की है असल हकीकत यही
इसे भली भाँति रमन मन मन समझना चाहिये ।
- रामकुमार जायसवाल रमन