ना मैं रुका ना मेरे उम्मीदों के प्रवाह रूके
पर कुछ लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे
शायद उन्हें पता हो,
दरख़्तों के शाखों से सीखा है मैंने जीना
जो ना फलों के बोझ से कभी टूटे और ना कभी परिन्दों की बोझ से झुके।
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