विज्ञापन

कड़क चाय

Rakshit Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी सर्द रात में दो बजे
        
                                                    
                            
जब मैं अपने कमरे से निकल के
तिराहे वाली चाय की दुकान पर
जा पहुँचुंगा चाय की तलाश में
और मिलेगी वो दुकान बंद मुझे
उस वक़्त मैं बिना नसीब को कोसे
और बिना दुकानदार को गालियां दिए
लौट आऊंगा अपने कमरे पर
और बड़े इत्मीनान से
मोबाइल में सहेजी हुई
तुम्हारी तसवीर को चूमते हुए
महसूस करना चाहूंगा
चाय के ज़ायके को
और मुझे उम्मीद है कि
उस दिन मुझे नसीब होगी
अपने ज़िन्दगी की
सबसे कड़क चाय।
- रक्षित मिश्रा
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all