विज्ञापन

जब जाने की बात करते हो

Rakshit Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई चाहता है तुम्हें
        
                                                    
                            
जानते हुए कि यह संसार नश्वर है
कोई पूजता है तुम्हें
ये मानकर के तू ही उसका ईश्वर है
कोई तुमसे जुड़ा है
ये जानते हुए कि रिश्ते आसानी से टूट जाते हैं
कोई तुम्हारा हाथ पकड़ना चाहता है
ये जानते हुए भी कि हाथ एक दिन छूट जाते हैं
प्रेम इस संसार के लिए कोई नई चीज़ नहीं है
पर निस्संदेह प्रेम संसार की एक बड़ी चीज़ है

प्रेम में पर्वत जितना सामर्थ्य होता है
सागर जितनी गहराई होती है
और सब कुछ सह जाने जितना धैर्य होता है
इंतज़ार जैसा कठिन और क्रूर काम भी
प्रेम में आकर ख़ूबसूरत हो जाता है
महबूब के दीदार में वो ताक़त होती है कि
शिकायतों की लम्बी फ़ेहरिस्त बेकार हो जाती है
प्रेम सिखाता है के आठ अरब लोगों की दुनिया में
एक व्यक्ति का वजूद कितना महत्त्व रखता है

मैं बहुत उदास हो जाता हूँ
जब मेरा प्यार तुम्हें छू नहीं पाता है
कोई चीज़ मेरे मन को खाए जाती है
जब मेरा प्यार तुम पर असर नहीं छोड़ पाता
मैं सोचता हूँ कि तुम्हारी मर्ज़ी है उसमें
मगर फिर मेरा मन सोचता है
कि क्यूँ मेरी मर्ज़ी तुम्हारी मर्ज़ी नहीं हो सकती?
मैं घण्टों तक स्वयं को कोसता हूँ
जब तुम किसी को अपनाने की बात करते हो
सिर्फ़ आँखें ही नहीं, मेरा दिल भी भर आता है
जब तुम मुझसे जाने की बात करते हो

-रक्षित मिश्रा
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all