आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जब जाने की बात करते हो

                
                                                         
                            कोई चाहता है तुम्हें
                                                                 
                            
जानते हुए कि यह संसार नश्वर है
कोई पूजता है तुम्हें
ये मानकर के तू ही उसका ईश्वर है
कोई तुमसे जुड़ा है
ये जानते हुए कि रिश्ते आसानी से टूट जाते हैं
कोई तुम्हारा हाथ पकड़ना चाहता है
ये जानते हुए भी कि हाथ एक दिन छूट जाते हैं
प्रेम इस संसार के लिए कोई नई चीज़ नहीं है
पर निस्संदेह प्रेम संसार की एक बड़ी चीज़ है

प्रेम में पर्वत जितना सामर्थ्य होता है
सागर जितनी गहराई होती है
और सब कुछ सह जाने जितना धैर्य होता है
इंतज़ार जैसा कठिन और क्रूर काम भी
प्रेम में आकर ख़ूबसूरत हो जाता है
महबूब के दीदार में वो ताक़त होती है कि
शिकायतों की लम्बी फ़ेहरिस्त बेकार हो जाती है
प्रेम सिखाता है के आठ अरब लोगों की दुनिया में
एक व्यक्ति का वजूद कितना महत्त्व रखता है

मैं बहुत उदास हो जाता हूँ
जब मेरा प्यार तुम्हें छू नहीं पाता है
कोई चीज़ मेरे मन को खाए जाती है
जब मेरा प्यार तुम पर असर नहीं छोड़ पाता
मैं सोचता हूँ कि तुम्हारी मर्ज़ी है उसमें
मगर फिर मेरा मन सोचता है
कि क्यूँ मेरी मर्ज़ी तुम्हारी मर्ज़ी नहीं हो सकती?
मैं घण्टों तक स्वयं को कोसता हूँ
जब तुम किसी को अपनाने की बात करते हो
सिर्फ़ आँखें ही नहीं, मेरा दिल भी भर आता है
जब तुम मुझसे जाने की बात करते हो

-रक्षित मिश्रा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर