विज्ञापन

उरी हमला..जंग का आगाज

rajni mahajan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सोये हुए वीर जवानो को
        
                                                    
                            
उन गददारो ने मारा था
जिस देश पर नजर थी उनकी
वो देश हमारा था ।
जिन माताओ की कोख उजडी थी
दिल उनके दलेर थे
जो शहीद हुए जवान हमारे
वो उन माताओं के शेर थे ।

जिसकी बहन विधवा हुई थी
उस वीर के अंदर यह जनून था
कहा हम लेगें बदला, उन जवानों का
जिनका बहा उरी में खून था ।

एक सलाहकार भी हमारा शेर था
आधी रात के अंदर सारा आंतक ढेर था
हर भारतीय का खून तब खोला था
जब कुछ वतनपरस्तो ने कायर हमें बोला था

हमारी वायु सेना से सारा लश्कर डोला था ।
खाक ही मिली उसे खाने को
मुँह उसनें जब जब खोला था
हमें उन देशभक्तों पर भी मान है
बताया जिन्होंने यह नया हिन्दुस्तान है ।

सुनील सिंह (हैप्पी), गांव .सितरयाला ,ज्योडिया
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all