तुम नंदन वन की हिरनी हो!
मैं रेगिस्तान का ऊँट प्रिये
तुम ताज महल सी इमारत हो!
मैं सोमनाथ की लूट प्रिये
तुम लक्ष्मी की दासी ठहरी!
मैं भोलेनाथ का दूत प्रिये
तुम आसमान की चंदा हो!
मैं काली रात का भूत प्रिये
चाह रही दुनियां तुमको
मुझको समझे छूत प्रिये!
तुम धमाचौकड़ी सी लगती
मैं लूला लंगड़ा मूक प्रिये!
तुम एक अप्सरा सी लगती!
मैं लगता हूँ यमदूत प्रिये
तुम गोदरेज की अल्मारी
मैं लकड़ी की संदूक प्रिये!
तुम ठहरी फूलों का गुच्छा!
मैं लगता हूँ बंदूक प्रिये
तुम यूक्रेन सी अड़ियल हो!
इस "राज" को समझो रूस प्रिये
- राजकुमार तिवारी "राज"
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