विज्ञापन

उन बातों में मैं हूँ तुम हो हम हैं

Rajiv tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यादों की गठरी में मेरी
        
                                                    
                            
बंधी हुई बहुत सी बातें हैं
कुछ ना भी हो पास मेरे
संग बचपन की यादें हैं
उन बातों में मैं हूँ तुम हो हम हैं
और यादों के सुहाने मौसम हैं
धुंधली सी तस्वीरों में हमारी
कभी कभी आँखें भी नम हैं
उजली धूंप के सवेरे हैं उनमें
खिलखिलाते तारों की रातें हैं
कुछ ना भी हो पास मेरे राजीव
पर संग बचपन की यादें हैं
यादों की गठरी में मेरी
बंधी हुई बहुत सी बातें हैं
अक्सर खोलकर मैं गठरी
अपना दिल बहलाता हूँ
खूब बातें करता हूँ ऐसे
जैसे तुमसे ही बतलाता हूँ
ऐसे में दूरी का मुझको
होता कभी अहसास नहीं
बंद करके पलकें अपनी
पा लेता हूँ तुम्हें पास यहीं
दुआओं भरे दिल में मेरे
स्नेह भरी सौगातें हैं
कुछ ना भी हो पास मेरे
संग बचपन की यादें हैं
यादों की गठरी में मेरी
बंधी हुई बहुत सी बातें हैं
उन बातों में मैं हूँ तुम हो हम हैं
और यादों के सुहाने मौसम हैं
- राजीव त्यागी

 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all