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ठंडी रेत

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी नंगे पैरों चलकर ठंडी रेत को
        
                                                    
                            
महसूस कीजिये,
खुली हवाओं में बेपरवाह ज़ुल्फ़ों को
बिखरने दीजिये,
गुज़रते लम्हों को कहिये के ज़रा
हौले चला करें,
जो गुनाह कल पर छोड़ रखे हैं उन्हें,
आज कर लीजिये.

 
2 महीने पहले
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