कभी नंगे पैरों चलकर ठंडी रेत को
महसूस कीजिये,
खुली हवाओं में बेपरवाह ज़ुल्फ़ों को
बिखरने दीजिये,
गुज़रते लम्हों को कहिये के ज़रा
हौले चला करें,
जो गुनाह कल पर छोड़ रखे हैं उन्हें,
आज कर लीजिये.
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