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तेरा जमाल

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं किसी ऊंचाई तक पहुंचा,
        
                                                    
                            
तिरा बड़ा जमाल है,
दुर्गम बीहड़ों में बना रास्ता,
तिरा ही कमाल है,
चोटियाँ तमाम बाक़ी हैं अभी,
फ़त्ह को संसार में,
रास्ता उनका भी होता होगा मालिक,
हिस्से जिनके महज़ मलाल हैं,
फुरसत दी तूने शब-ए-फ़ुर्क़त में,
तिरा बड़ा जलाल है,
ज़माना बदस्तूर ख़िलाफत में रहा,
पर तुझको मिरा ख़्याल है,
बदहवास से भटकते दर-ब-दर
रहबर इस शहर में,
हो पुरसान-ए-हाल उनका भी कोई
तुझसे बस इक सवाल है.

 
एक महीने पहले
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