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पुन: उसी प्रजापालक भूपति कृष्ण का

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे चक्रधर, कुचक्र हैं चहुँ ओर,
        
                                                    
                            
चक्र चाहिए,
हे राधिका प्रिय, प्रदर्शन हुए विभत्स,
सुदर्शन चाहिए,
हरण हो रहा धरा के चीर का प्रतिपल
निशिदिन,
पुन: उसी प्रजापालक भूपति कृष्ण का
अवतरण चाहिए.

 
एक महीने पहले
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