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पत्थर के सहन

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ी बस्तियाँ में गर छोटे घर भी बनें
        
                                                    
                            
तो कुछ बात हो,
पत्थरों के सहन में इंसानियत भी रहे
तो कुछ बात हो,
कानून है मगर रखवाल को रखवाला
मुस्तैद नहीं,
लुटेरों के घरों में भी कभी सेंध लगे
तो कुछ बात हो!

 
3 घंटे पहले
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