बड़ी बस्तियाँ में गर छोटे घर भी बनें
तो कुछ बात हो,
पत्थरों के सहन में इंसानियत भी रहे
तो कुछ बात हो,
कानून है मगर रखवाल को रखवाला
मुस्तैद नहीं,
लुटेरों के घरों में भी कभी सेंध लगे
तो कुछ बात हो!
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