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मुंडेर पर देखे सपने

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देखता है तू बैठकर मुंडेर पर दिन में,
        
                                                    
                            
आने वाले कल के सपने,
बरसों की जमा पूंजी लूट ले गये वह,
समझा था तूने जिन्हें अपने,
सचमुच बड़ा मुश्किल होता है जीना
देखे बग़ैर सपनों के,
लूटकर तेरे सपनों को लुटेरा अब मगर,
लगा है सच की माला जपने.

 
2 घंटे पहले
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