विज्ञापन

कभी रन में कभी बन में

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुझसे बे-पनाह मुहब्बत में सराबोर है
        
                                                    
                            
मिरा तन और मन।
एक तू है 'माँ', जिसका ठिकाना है
कभी रन तो कभी बन।।

 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile