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बाज़ार आजकल

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़रीद-फ़रोख़्त का आजकल
        
                                                    
                            
बाज़ार ख़ूब गर्म है,
बिक रहीं हाथों-हाथ अस्मतें,
ग़ैरत और शर्म है,
ईमान और ख़ुद्दारी की क़ीमतें
बढ़-बढ़कर लग रहीं,
तहज़ीब, तालीम और इज़्ज़त का मगर
भाव बड़ा नर्म है.

 
3 महीने पहले
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