ख़रीद-फ़रोख़्त का आजकल
बाज़ार ख़ूब गर्म है,
बिक रहीं हाथों-हाथ अस्मतें,
ग़ैरत और शर्म है,
ईमान और ख़ुद्दारी की क़ीमतें
बढ़-बढ़कर लग रहीं,
तहज़ीब, तालीम और इज़्ज़त का मगर
भाव बड़ा नर्म है.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X