राग-रंग और नव तरंग, सभी जीवनोत्सव मनाएँ कृष्णा संग,
गोप-गोपियाँ, सब नर-नारी, हर ओर छाए जीवन-प्रेम का रंग।
मेरे कान्हा, तुम मोहे रंग दो, ऐसा रंग कि सब रह जाएँ दंग,
ऐसा प्रेम भरो मोरे जीवन में, जैसा भरा राधा के अंग-अंग।
ऐसी रंग दो यह मोरी चुनरिया, रहूँ सुहागिन सदा जन्म-जन्म,
प्रेम-पिचकारी ऐसी प्रभु मारो, रंग जाए यह तन-मन हरदम।
मनोहर तोरी मुरली की धुन पर , सब गऊ-ग्वाल हों तेरे संग,
यमुना तट पर आ जाओ मेरे कान्हा, रास रचाओ मेरे संग।
वृंदावन की पावन गलियों में, प्रभु घूमूँ मैं होकर आपके संग,
हरे कृष्ण, हे श्री नारायण! शीश नवाऊँ तोरे चरण-कमल संग।
हमें भी ऐसा ज्ञान दो कान्हा, जीत जाएँ जीवन की हर जंग,
जैसा ज्ञान दिया प्रभु अर्जुन को, बनकर उसके सारथी संग।
द्वापर में जो धर्म बचाया, कलियुग को भी कान्हा करो चमन,
प्रेम-रंग भर दो हर प्राणी के हृदय में, मिट जाए मन का तम।
नष्ट करो प्रभु मोरे अवगुण सारे, जैसे नष्ट कियो पापी कंस,
जय पीताम्बरधारी नारायण, जय विष्णु, जय श्री चतुर्भुजम्।
राग-रंग और नव तरंग, आओ जीवनोत्सव मनाएं कान्हा संग,
प्रेम-सुधा बरसे 'अगस्त्य' में, हर मन रंग जाए कान्हा के रंग।
-राजेश शर्मा 'अगस्त्य'