हिंदी, भारत के ह्रदय की भाषा है,
साहित्य उपवन के नव सृजन की आशा है,
ये ही संस्कृति का एक जल प्रपात है,
तिमिर में यही ज्ञान का शुभ प्रभात है,
भाषाओं में एक सुवासित पद्मिनी है,
आर्यवर्त की विरासत संस्कृत की नंदिनी है,
कबीर वाणी के जीवन दर्शन का प्रासाद है,
तुलसी और सूर के अध्यात्म का प्रसाद है,
बिहारी के श्रंगार की यही है सुन्दर माला,
महादेवी और प्रसाद की लेखनी धूप में है 'छाया',
पंत, 'अज्ञेय' और 'सुमन 'का साहित्य है निराला,
सुभद्रा के शब्दों में है वीरता की ज्वाला,
हिंदी ही भारत के विपणन का आधार है,
हिंदी ही अभिव्यक्ति का प्रमुख संचार है,
विश्व की तीसरी लोकप्रिय भाषा है हिंदी,
भारत के ललाट की बिंदी है हमारी हिंदी |