भाद्रपाद अष्टमी फिर आयी है,
एक अजन्मे आज जन्मदिन है,
जिनका है श्यामल सा कृष्ण रंग,
कृष्ण ही हैँ अँधेरे में एक उजाला,
मुरली की सभी धुनों में है श्याम,
राधा जी के के ह्रदय में हैं श्याम,
अब पुनः प्रकट हो जाओ श्याम,
कितना अधर्म छाया है जग में?,
धर्म की विजय कराओ केशव,
कितने सुदामा आज प्रतीक्षारत हैँ?
मित्रता का वचन निभाने आ जाओ,
कंस रुपी आतंक का कब होगा अंत?,
सुदर्शन के दर्शन तो हे प्रभु अनन्त,
कालिया नाग की हो जाएगी हार,
टूटेगा जायेगा इंद्र सा वो अहंकार,
ज़ब बोलोगे मुख से मधुर वाणी आप ,
गीता के अमृत सा होगा मधुर बसंत,
जीवन दर्शन का दर्शन दो प्रभु अनन्त |