विज्ञापन

कुछ खबर न थी किसी को बात की

Rajesh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ खबर न थी किसी को बात की
        
                                                    
                            
सौ बात बन गईं एक बात की

वो किसी और के साथ न करना
जो हरकत तुमने हमारे साथ की

हम नहीं तुम्हारी तरह दोगले
न दोगली बातें हमने किसी के साथ की

तलबे नहीं चाटे हमारे घर ने किसी के
यही पहचान है ऊँचे खानदान की

यहाँ होती है कद्र कहाँ इंसान की
जितनी कद्र होती है यहाँ सामान की

जिसे अपना समझकर राज़ बताया
उसी ने इज्जत हमारी नीलाम की
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Deepti Tripathi

119 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile