कुछ खबर न थी किसी को बात की
सौ बात बन गईं एक बात की
वो किसी और के साथ न करना
जो हरकत तुमने हमारे साथ की
हम नहीं तुम्हारी तरह दोगले
न दोगली बातें हमने किसी के साथ की
तलबे नहीं चाटे हमारे घर ने किसी के
यही पहचान है ऊँचे खानदान की
यहाँ होती है कद्र कहाँ इंसान की
जितनी कद्र होती है यहाँ सामान की
जिसे अपना समझकर राज़ बताया
उसी ने इज्जत हमारी नीलाम की