आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कुछ खबर न थी किसी को बात की

                
                                                         
                            कुछ खबर न थी किसी को बात की
                                                                 
                            
सौ बात बन गईं एक बात की

वो किसी और के साथ न करना
जो हरकत तुमने हमारे साथ की

हम नहीं तुम्हारी तरह दोगले
न दोगली बातें हमने किसी के साथ की

तलबे नहीं चाटे हमारे घर ने किसी के
यही पहचान है ऊँचे खानदान की

यहाँ होती है कद्र कहाँ इंसान की
जितनी कद्र होती है यहाँ सामान की

जिसे अपना समझकर राज़ बताया
उसी ने इज्जत हमारी नीलाम की
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर