है लहू गर्म, आतिशी हैं इरादे आज
आँख हैं नम, आतिशी हैं इरादे आज
धरती दुहाई दे रही रणबांकुरों के खून की
तलाश है हर तरफ, अब उड़ चुके सुकून की
इस धरा से आस्मां तक, जर्द है हर इक निशां
दर्द मेरे देश का कर सके न कोई बयां
अस्मतें हैं लुट चुकी धर्म की ईमान की
ये कैसी तस्वीर है, आज मेरे हिंदुस्तान की
नफरतों की ये दीवारें, कोई तो गिरा दे आज
है लहू गर्म, आतिशी हैं इरादे आज
आँख हैं नम, आतिशी हैं इरादे आज
बलिदान वीर शहीदों का न जाया होने पाए
भरो हुंकार अब ऐसी कि दुश्मन खड़ा थर्राये
आगे बढ़ चुके कदम, न अब पीछे हटने पाएं
कुछ करो जतन ऐसा कि राहें नयी खुल जाएँ
है कसम तुमको हर शहीद के अरमान की
लाज बचा लो अपनी रूह के सम्मान की
क़र्ज़ मातृभूमि का, कोई तो चुका दे आज
है लहू गर्म, आतिशी हैं इरादे आज
आँख हैं नम, आतिशी हैं इरादे आज
उम्मीद की नन्ही किरन भी, चीर सकती तम का सीना
इक पहल भी न हो सके तो व्यर्थ है ऐसा जीना
तोड़ सारी बंदिशें, बस डट जाओ मैदान में
फर्क पहले जान लो पर संत में शैतान में
ये जात धरम सब छोड़ के सारे बढ़ो अब साथ में
डोर सत्ताधारियों की थाम लो अब हाथ में
इन आडम्बरों के फेर से, कोई तो छुड़ा दे आज
है लहू गर्म, आतिशी हैं इरादे आज
आँख हैं नम, आतिशी हैं इरादे आज
हर दिशा से आ रही, अब यही पुकार है
भावी पीढ़ियों को हमारी, सुख शांति की दरकार है
रहो न खामोश कह रहा, ये वीभत्स मंजर आप से
मुक्त करो मानवता को, इस आतंक के अभिशाप से
आज़ादी के परवानो सी, फिर एक कहानी चाहिए
आज फिर इस खून में, वही रवानी चाहिए
संकल्प कर आतंक का नामो निशां मिटा दे आज
है लहू गर्म, आतिशी हैं इरादे आज
आँख हैं नम, आतिशी हैं इरादे आज
शांतिदूत बन चुके, अब क्रांतिदूत बन उभर
वार्ताएं हो चुकी, अब सशस्त्र हो कर समर
लहरा दो परचम आज तुम साहस और शौर्य का
फूंको शंखनाद तुम, शत्रु के विनाश का
दिला दो याद विश्व को, वो स्वर्णिम इतिहास फिर
बुझा दो आज रक्त से वसुंधरा की प्यास फिर
कर वज्रपात अब, शत्रु पे गिरा दे गाज
है लहू गर्म, आतिशी हैं इरादे आज
आँख हैं नम, आतिशी हैं इरादे आज
-डॉ राजबाला यादव
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