विज्ञापन

जो सीरत आईंने में दिखता नहीं...

रंजीत कुमार अर्णव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टूटे हुए दर्पण में हमें ए -चेहरे दिखा रहें हैं!
        
                                                    
                            
अपने ही दर्पण को हम से छुपा रहे हैं !
हरआईंने में नहीं दिखाती है! सूरत उस की!
देखते ही सीरत उस की पहचान लेते हैं हम!
हर शख्स की तरह नहीं हैं हम, बस देखते ही, सूरत उस की पहचान लेते हैं! हम......!
-अर्णव...
1 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all