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एक दिन ये रंगमंच छोड़कर जाना है,

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यही है ज़िंदगी
        
                                                    
                            

अपना किरदार निभाना है,
एक दिन ये रंगमंच छोड़कर जाना है,
यही तो ज़िंदगी है—
हर रंग में ढलते जाना है।

कभी हँसी, कभी आँसू लेकर,
इस मंच पर चलते जाना है।
न कोई यहाँ सदा ठहरता है,
न कोई अपना किरदार बदलता है।

जिसे जो भूमिका मिली है जीवन में,
उसे निभाकर ही आगे बढ़ना है।
तालियाँ मिलें या ताने मिलें,
हर हाल में मुस्कुराना है।

क्योंकि एक दिन ये रंगमंच छोड़कर,
सबको अकेले ही जाना है।
जीवन एक नाटक, हम किरदार हैं,
आज हमारा दृश्य है यहाँ,
कल किसी और की बारी है।

यही जीवन है, यही ज़िंदगी है।
— रजनी
52 मिनट पहले
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