चार चीज़ों में बँटी इंसान की ज़िंदगी
आम आदमी की ज़िंदगी अक्सर चार चीज़ों से तय होती है—
उम्र, लिंग, वर्ण और अर्थ।
उम्र बदल दो,
तो व्यवहार बदल जाता है,
लिंग बदल दो,
तो नज़र और संसार बदल जाता है।
वर्ण बदल दो,
तो पहचान बदल जाती है,
और अर्थ—यानी धन—बदल दो,
तो रिश्तों का व्यवहार तक बदल जाता है।
गरीब को अमीर कर दो,
अमीर को गरीब कर दो,
देखना, इंसान वही रहेगा,
मगर दुनिया का रवैया बदल जाएगा।
ग़ज़ब की विडंबना तो देखिए—
इन चारों में हमारा अपना क्या है?
उम्र और लिंग प्रकृति ने दिए,
वर्ण और अर्थ समाज ने दिए,
फिर भी इन्हीं के आधार पर
इंसान को परखा जाता है।
शायद इंसान की सबसे बड़ी पहचान
न उम्र है, न लिंग, न जाति, न धन—
उसका चरित्र है,
उसका व्यवहार है,
और उसका इंसान होना है।