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शर्त बस इतनी है

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शर्त बस इतनी है
        
                                                    
                            

चली तो मैं जाऊँ तुमको कहीं छोड़कर,
लेकिन शर्त बस इतनी है—
जितने नाज़ों से मैंने तुमको पाला है,
उतनी ही परवाह करने वाला
पहले अपने जीवन में लाओ।

मुझे भरोसा हो जाए
कि वह भी मेरी तरह वफ़ादार है,
फिर कुछ दिन उसके साथ रहकर
तुम खुद भी देख लेना—
अगर तुमको मुझसे बेहतर कोई साथी मिल जाए,
तो मैं तैयार हूँ तुम्हारी राह छोड़ने को।

क्योंकि मेरी फ़ितरत है,
मैं किसी को बेसहारा करके नहीं जाती,
जिसे थामा है मैंने,
उसे सहारा देकर ही छोड़ती हूँ।

मैं बेवफ़ा का तमगा नहीं चाहती,
न किसी की बददुआ लेना चाहती हूँ,
बस इतना चाहती हूँ
कि मेरे जाने के बाद भी
तुम्हें मेरी कमी महसूस न हो।

आज़मा लो मुझे,
कोई मुझसे बेहतर साथी मिल जाए
तो तुम जा सकते हो…
मैं नहीं।
— रजनी
4 घंटे पहले
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