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सच को वक़्त चाहिए

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच को वक़्त चाहिए
        
                                                    
                            

मस्त रहने का एक तरीका
मैंने भी सीख लिया है—
लोगों को मौका दो
कि वे तुम्हें खो दें।

उन्हें मौका दो
कि वे तुम्हें गलत समझें,
अपने हिसाब से तुम्हारी
कोई भी कहानी गढ़ें,
तुम्हारे बारे में
जो चाहे कहते रहें।

बस तुम
सफ़ाई देने में जल्दबाज़ी मत करना।

मैंने बहुत सफ़ाइयाँ दी हैं,
हर इल्ज़ाम का जवाब दिया,
हर गलतफ़हमी को मिटाने की कोशिश की—
नादान थी शायद,
इसलिए हर बार
खुद को साबित करती रही।

अब नहीं।

अब जो समझना है,
उन्हें समझने दो,
जो कहानी बनानी है,
उन्हें बनाने दो।

क्योंकि झूठ को
हर बार जवाब देना ज़रूरी नहीं,
कभी-कभी उसे
वक़्त के हवाले कर देना चाहिए।

झूठ को जवाब नहीं,
वक़्त चाहिए—
और सच को सफ़ाई नहीं,
बस सामने आने का इंतज़ार।

क्योंकि सच
कितना भी दबा दिया जाए,
एक दिन
खुद अपनी आवाज़ बनकर
सामने आ ही जाता है।
— रजनी
एक दिन पहले
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