सबसे खतरनाक व्यक्ति
सबसे खतरनाक व्यक्ति वह होता है,
जिसे अपने ऊपर कभी शक नहीं होता,
जो अपनी हर बात को सत्य समझता है,
और अपनी हर गलती से बेखबर होता है।
उसे सौ प्रतिशत यकीन होता है—
“मैं तो अच्छा व्यवहार करता हूँ,”
मेरी बात ही सही है हर बार,
दूसरा ही गलत है,
वह बस यही मानता है।
अपनी कमियाँ उसे दिखाई नहीं देतीं,
दूसरों की कमियाँ गिनते-गिनते थकता नहीं,
अपनी सोच से बाहर निकलना
उसे कभी आता ही नहीं,
और बदलना तो जैसे उसकी फितरत में ही नहीं।
ऐसे व्यक्ति से लचीले व्यवहार की
उम्मीद करना भी व्यर्थ है,
क्योंकि अपनी धारणाओं के आगे
उसकी बुद्धि भी विवश है।
संवेदनशीलता नाम की कोई चीज़
उसकी शब्दावली में होती ही नहीं,
दूसरे के दर्द को समझ सके—
इतनी जगह उसके भीतर होती ही नहीं।
वह अपने लिए भी खतरनाक है,
और दूसरों के लिए भी,
क्योंकि जो स्वयं पर सवाल नहीं करता,
वह दूसरों पर उँगली उठाते-उठाते
रिश्ते भी खो देता है और इंसानियत भी।
याद रखना—
गलती मान लेना कमजोरी नहीं,
अपने ऊपर सवाल करना हार नहीं,
बल्कि वही इंसान मजबूत होता है
जो कह सके—
“हो सकता है, इस बार मैं गलत हूँ।”
-रजनी