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प्रेम—जो दिया जाता है

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रेम—जो दिया जाता है
        
                                                    
                            

जो प्रेम आप अपने लिए
ढूँढ़ते फिरते हैं,
अपनी उम्मीदों के मुताबिक
जिसे पाना चाहते हैं,

वह प्रेम
सिर्फ देना संभव है,
पाना नहीं।

क्योंकि प्रेम कोई सौदा नहीं
कि जितना दिया,
उतना लौटकर मिल जाए,
न ही कोई उम्मीद है
जिसे सामने वाला पूरा करे।

प्रेम तो वह है
जो बिना शर्त दिया जाए,
बिना हिसाब दिया जाए,
बिना इस प्रतीक्षा के
कि बदले में भी वही मिलेगा।

जिस दिन प्रेम को पाने की चाह छोड़कर
उसे बाँटना सीख जाओगे,
उस दिन समझोगे—
जिस प्रेम की तलाश में
तुम दर-दर भटक रहे थे,
वह तुम्हारे भीतर ही था।

— रजनी
एक महीने पहले
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