प्रलय का स्रोत हमेशा पानी ही होगा,
चाहे नदी में उफान मारे,
या किसी की आँखों में बहता हो।
कहीं बाढ़ बनकर सब कुछ बहा ले जाएगा,
कहीं आँसू बनकर
मन का सारा दर्द कह जाएगा।
पानी का स्वभाव है बहना,
पर जब हद से गुजर जाए,
तो शांत दिखने वाला पानी भी
प्रलय बन जाता है।
— रजनी