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मौन का समय

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मौन का समय
        
                                                    
                            

जो लोग आज मौन हैं,
वे अपने हिस्से का चीख चुके हैं,
बस उनकी आवाज़ अब
किसी को सुनाई नहीं देती।

और जो आज चीख रहे हैं,
वक्त उन्हें भी
एक दिन मौन कर देगा।

जो आज रो रहे हैं,
उनके आँसू भी
एक दिन थम जाएँगे,
आँखें सूख जाएँगी,
होंठ खामोश हो जाएँगे।

क्योंकि वक्त के सामने
किसी की चीख स्थायी नहीं,
किसी का विलाप अनंत नहीं।

हर आवाज़ को
एक दिन थकना है,
हर आँसू को
एक दिन सूखना है,
और हर इंसान को
अपने हिस्से का मौन
ओढ़ना है।

इसलिए किसी के मौन को
उसकी कमजोरी मत समझना,
हो सकता है
वह बहुत पहले
अपनी सारी चीखें
जी चुका हो।

— रजनी
एक महीने पहले
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